6/07/2005

सोचता हूँ ...


ये मेरी देह महकी आज चन्दन सी अचानक क्यों
तुम्हारी साँस चुपके से बदन को छू गई होगी ।

हुए हैं ख्वाब क्यों मेरे अचानक और भी मीठे
तुम्हारी नींद , पलकों मे मेरी, आ सो गई होगी ।

2 comments:

sarika saxena said...

बहुत ही सुन्दर और कोमल अभिव्यक्ति है!

abhiranjan kumar said...

achha hai anoop ji, achha sochte hai aap! do hi sher hai, lekin inme se har sher sawa ser hai.