7/20/2005

एक शेर लिखा है .....


वो पलक मूँद कर हौले से मुस्कुराये हैं
उन के तस्सवुर में जानें कौन आया है

अनूप

2 comments:

Pratyaksha said...

निगाहें नीची किये वो बैठे हैं
जाने किसको चिलमन में छुपाया है

प्रत्यक्षा

devinangrani said...

गुफ्तगू का तो कोई मोल नहीं
मैंने खामोशी को सजाया है।

देवी नागरानी