ख्वाबों को ऐसे सजाया है मैंने
हथेली पे सूरज उगाया है मैंने ।
आओ न तुम , तो मर्जी तुम्हारी
बड़े प्यार से पर बुलाया है मैंनें ।
लिखा ओस से जो तेरा नाम ले के
वही गीत तुम को सुनाया है मैंने ।
जीवन की सरगम तुम्ही से बनी है
तुझे नींद में गुनगुनाया है मैंने ।
मेरे आँसुओं का सबब पूछते हो
कतरा था यूँ ही बहाया है मेंने ।
1/22/2006
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

7 comments:
कोई पलाश दहकता था कानों के पीछे
कभी फूलों को यूँ भी सजाया है मैंने
बहुत सुन्दर...
simple and beautiful
आपको यहाँ टैग किया गया
बहुत अच्छा लिखा है...मैं भी आपके पास ही न्यू जर्सी में रहता हूं।
छुपा अपने आंसू के मोती तुम्ही से
तेरे दर्द को अब सजाया है मैंने.
न जाने बहा दर्द देवी कुछ ऐसे
सभी बादलों को रुलाया है मैंने.
देवी
बहुत सुन्दर है....
बहुत अच्छा लिखा है......
Prithvi Raj Chauhan
Post a Comment