देखो मान लो
कल रात
तुम मेरे
सपनों में
आई थीं ,
वरना
सुबह सुबह
मेरी आँखो की
नमी का मतलब
और क्या
हो सकता है ?
----
चलो
अब उठ जाओ
और
जमानें को
अपनें चेहरे की
ज़रा सी रोशनी दे दो
देखो
सूरज खुद
तुम्हारी खिड़की पर
तुम से रोशनी
मांगनें आया है ।
5/03/2006
दो कविताएं
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7 comments:
अनूप जी,
दोनो ही कम शब्दों मे गहरी बात कह रही हैं, बहुत बधाई...
समीर लाल
गागर में सागर ,वाह !
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edprehiem3088667172 भाईसाहब :
मेरे ज्ञान में कुछ कमी लगी हो तो बतायें ? ये इतनी College Degree का बोझ कैसे उठा सकेगी मेरी अक्षम काया ...
सादर
अनूप भार्गव
हिंदी विदेश प्रसार सम्मान प्राप्त होने पर हार्दिक बधाईयाँ!
Beautiful verses. Well written, Anoop.
और क्या कहूं..बस.... वाह!!!!!!!!
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